भोपाल। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में आयोजित 'हिंदी पखवाड़ा' का पुरस्कार वितरण समारोह उत्साह और गर्व से भरा रहा, जिसमें वरिष्ठ कवि-कथाकार और विश्व रंग के निदेशक संतोष चौबे ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने अपने उद्बोधन में हिंदी के वैश्विक विस्तार और संभावनाओं पर जोर दिया। चौबे जी ने कहा हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे हमें वैश्विक स्तर पर मजबूत करना चाहिए।
उन्होंने आगे बताया कि टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र और विश्व रंग के संयुक्त प्रयासों से शीघ्र ही 'अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलंपियाड' का आयोजन होगा, जिसमें 10 लाख से अधिक युवा और हिंदी प्रेमियों को जोड़ा जाएगा। यह ओलंपियाड हिंदी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और इसे एक वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम साबित होगा।
हिंदी दिवस के महत्व पर डाला प्रकाश
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. अमिताभ सक्सेना ने हिंदी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को केंद्र सरकार की आधिकारिक राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। यह निर्णय देशभर में हिंदी के व्यापक प्रसार का प्रतीक है और तभी से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।
रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के हिंदी पखवाड़े में न केवल विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों, बल्कि आसपास के विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं में वाद-विवाद, काव्य गोष्ठी, हिंदी शुद्ध लेखन, पोस्टर निर्माण, चित्रकला और निबंध लेखन जैसी कई रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की गईं। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य हिंदी भाषा को न केवल शिक्षण संस्थानों में, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना था।
हिंदी हमारी पहचान
इस अवसर पर टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र के निदेशक डॉ. जवाहर कर्नावट ने अपने संबोधन में कहा हम हिंदी की सेवा नहीं कर रहे हैं, बल्कि हिंदी हमारी पहचान और सम्मान को विश्वभर में स्थापित कर रही है। हिंदी के माध्यम से हम वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं और यह समय है कि हम इसे और ऊंचाइयों तक पहुंचाएं।
समारोह की शुरुआत पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन और मां शारदा की मूर्ति पर माल्यार्पण के साथ की गई। डॉ. संगीता जौहरी, प्रतिकुलपति, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय ने स्वागत उद्बोधन दिया, जिसमें उन्होंने अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया। डॉ. मौसमी परिहार ने हिंदी पखवाड़े के प्रतिवेदन का प्रस्तुतीकरण किया और विश्वविद्यालय में हुए विभिन्न कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं की विस्तृत जानकारी दी।
विजेतओं को प्रतीक चिन्ह किए गए प्रदान
इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रतीक चिन्ह और सम्मान पत्र प्रदान किए गए। विजेताओं ने अपनी रचनात्मकता और प्रतिभा के माध्यम से हिंदी के प्रति अपने प्रेम और समर्पण को दर्शाया। हिंदी पखवाड़े के आयोजन ने छात्रों के भीतर न केवल हिंदी के प्रति जागरूकता पैदा की, बल्कि उनमें रचनात्मक सोच और सृजनात्मक क्षमता का भी विकास किया।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. रुचि मिश्रा तिवारी ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा हिंदी पखवाड़े के दौरान हुई प्रतियोगिताओं और गतिविधियों ने विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों को हिंदी के महत्व को समझने का अवसर दिया। यह पखवाड़ा न केवल भाषा का उत्सव था, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी था।
हिंदी केवल एक भाषा नहीं, हमारी संस्कृति है
रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित हिंदी पखवाड़ा ने यह सिद्ध कर दिया कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान का अभिन्न हिस्सा है। यह आयोजन हिंदी के वैश्विक विस्तार के साथ-साथ उसे रोजगार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है।
कार्यक्रम का संचालन पुष्पेन्द्र बंसल द्वारा किया गया, जबकि बड़ी संख्या में प्राध्यापक, छात्र और आसपास के विद्यालयों के विद्यार्थियों ने इस रचनात्मक और सार्थक कार्यक्रम में भाग लिया। इस हिंदी पखवाड़े ने न केवल हिंदी के प्रति लोगों की सोच को मजबूत किया, बल्कि इसे एक सशक्त भाषा के रूप में विश्व मंच पर स्थापित करने के लिए प्रेरित भी किया।
एक नई सोच और दिशा
अंत में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के हिंदी पखवाड़े का आयोजन एक नई सोच और दिशा की ओर इंगित करता है। यह हिंदी भाषा के वैश्विक मंच पर उभरने की एक नई कहानी लिखने की शुरुआत है, जिसे आने वाले वर्षों में और भी ऊंचाइयों पर पहुंचाया जाएगा।
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