गौरक्षा

गौरक्षा के लिए अनिश्चितकालीन धरने का 10वां दिन, विभिन्न सामाजिक संगठनों का समर्थन

मध्य प्रदेश अखिल भारतीय सर्वदलीय गौरक्षा महाभियान समिति द्वारा दिया जा रहा धरना

भोपाल। मध्य प्रदेश अखिल भारतीय सर्वदलीय गौरक्षा महाभियान समिति द्वारा गौमाता की सुरक्षा और सम्मान के लिए शुरू किया गया अनिश्चितकालीन धरने का मंगलवार को 10वें दिन था। इस धरने का आयोजन एमपी नगर के बालाजी वाटिका हनुमान मंदिर आश्रम के पास किया जा रहा है, जहां समिति के सदस्य और समर्थक विभिन्न मांगों को लेकर डटे हुए हैं। मुख्य मांगों में रेडरिंग प्लांट और इंसिनेटर को अलग-अलग स्थानों पर 25 से 30 किलोमीटर की दूरी पर शिफ्ट करना, गौमाता को पशु सूची से हटाकर गौ सूची में शामिल करना और गौमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं।

समिति का उद्देश्य गौमाता की सुरक्षा और उनके सम्मान को बढ़ाना है। समिति का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में गौमाता को पशु के रूप में देखा जा रहा है, जो उनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के विपरीत है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष गौरव मिश्रा ने बताया कि यह धरना तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं की जातीं। उनका कहना है कि गौमाता को राज्यमाता का दर्जा देकर उनकी सुरक्षा और सम्मान को बढ़ावा दिया जा सकता है।


विभिन्न संगठनों का समर्थन

मंगलवार को धरने को और बल मिला जब विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने अपनी सहमति पत्र सौंपकर समिति के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। प्रांतीय कुशवाहा समाज, प्रांतीय मेर समाज, प्रांतीय गोस्वामी समाज संगठन और प्रांतीय श्री दिगंबर जैन परिवार सभा ने अखिल भारतीय सर्वदलीय गौरक्षा महाभियान समिति को समर्थन पत्र दिए। इन संगठनों ने गौरक्षा के प्रति अपने समर्पण को दोहराया और समिति की मांगों के साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया।

समिति के प्रदेश अध्यक्ष गौरव मिश्रा की उपस्थिति में यह समर्थन पत्र सौंपे गए। इस दौरान प्रमुख रूप से धर्मेंद्र पंडित, शिवांगी ठाकुर, कृष्णा बुंदेला, हेमराज सिंह मेर, मुकेश मेर, योगेश मानसिंह कुशवाहा, महेंद्र कुशवाहा, कैलाश कुशवाहा, बसंत पुरी गोस्वामी, दीपचंद शास्त्री और राकेश नामदेव उपस्थित रहे। इन सभी ने समिति की मांगों को न केवल जायज बताया, बल्कि सरकार से जल्द से जल्द इन पर अमल करने की अपील भी की।

प्रमुख मांगें और उनके पीछे की वजहें

समिति की प्रमुख मांगों में से एक रेडरिंग प्लांट और इंसिनेटर को 25 से 30 किलोमीटर दूर विपरीत दिशा में शिफ्ट करने की है। समिति का कहना है कि इन दोनों का एक ही स्थान पर होना स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरनाक है। इसलिए इनकी अलग-अलग स्थानों पर स्थापना जरूरी है। इसके साथ ही गौमाता को पशु सूची से हटाकर ‘गौ सूची’ में शामिल करने की मांग की जा रही है। समिति का मानना है कि गौमाता का दर्जा अन्य पशुओं से अलग होना चाहिए, क्योंकि भारतीय संस्कृति में उनका स्थान विशेष और पवित्र है। गौमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने की मांग का उद्देश्य उनके प्रति सम्मान को बढ़ाना है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सरकार से अपील

समिति ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों से अपील की है कि उनकी मांगों को गंभीरता से लिया जाए। उनका कहना है कि गौमाता की सुरक्षा और सम्मान के लिए यह कदम जरूरी हैं। समिति का मानना है कि यदि इन मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो गौमाता की स्थिति और खराब हो सकती है, जिससे पर्यावरण और सामाजिक ताने-बाने पर भी असर पड़ेगा।

समिति के सदस्यों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे हैं और किसी भी तरह की हिंसा का सहारा नहीं लेंगे। उनका उद्देश्य केवल सरकार को अपनी मांगों के प्रति जागरूक करना और जल्द से जल्द समाधान प्राप्त करना है।

जनता की सहभागिता

इस धरने में विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हो रहे हैं, जो दिखाता है कि गौरक्षा का मुद्दा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है। समिति के इस आंदोलन को लगातार जनसमर्थन मिल रहा है और आने वाले दिनों में यह और बढ़ने की संभावना है।

धरना स्थल पर दिन-रात उपस्थित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों का समर्थन इस आंदोलन को और अधिक मजबूती दे रहा है। अब देखना यह है कि सरकार कब तक समिति की मांगों पर कार्रवाई करती है और गौरक्षा के इस महाभियान का समाधान क्या निकलता है।

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