मैनिट

मैनिट के 12 शीर्ष शोधकर्ता स्टैनफोर्ड की शीर्ष वैज्ञानिकों की सूची में शामिल

देश को दिलाई विशिष्ट पहचान, संस्थान का नाम किया गौरवान्वित

भोपाल। मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) के 12 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में प्रकाशित दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत सर्वाधिक उद्धृत वैज्ञानिकों की सूची में जगह बनाकर संस्थान को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि मैनिट के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और भारत के अनुसंधान और नवाचार में बढ़ते वैश्विक प्रभाव का भी प्रमाण है।

स्टैनफोर्ड की सूची: विज्ञान और अनुसंधान का मापदंड

यह सूची स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन इयोनिडिस के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा तैयार की गई है और विश्व-प्रसिद्ध प्रकाशन कंपनी एल्सेवियर बीवी द्वारा प्रकाशित की गई है। इस सूची को वैज्ञानिक समुदाय में अत्यधिक प्रतिष्ठित माना जाता है, क्योंकि इसे मानकीकृत उद्धरण संकेतकों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें स्कोपस डेटाबेस में निहित ग्रंथ सूची संबंधी जानकारी का विश्लेषण किया जाता है।

इस सूची में दुनियाभर के 223,252 वैज्ञानिक शामिल हैं, जो 2023 में 4,635 और 2022 में 3,000 से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं। यह वैश्विक शोध में भारत की भूमिका और प्रभाव में हो रही वृद्धि को भी दर्शाता है। इस सूची को 22 वैज्ञानिक क्षेत्रों और 174 उप-क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें मैनिट के शोधकर्ताओं का योगदान खासतौर पर उल्लेखनीय है।

मैनिट के प्रमुख शोधकर्ता

मैनिट के जिन 12 शोधकर्ताओं को इस सूची में शामिल किया गया है, वे विभिन्न वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त कर रहे हैं। इनमें से कुछ शोधकर्ता पिछले पांच वर्षों से लगातार इस प्रतिष्ठित सूची का हिस्सा बने हुए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख नाम और उनके अनुसंधान कार्य इस प्रकार हैं। 

डॉ. आलोक मित्तल - रसायन विज्ञान विभाग

डॉ. मित्तल पर्यावरण विज्ञान, जल उपचार और भौतिक रसायन विज्ञान में विशेषज्ञता रखते हैं। उनके शोधकार्य जल प्रदूषण के उपचार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

डॉ. ज्योति मित्तल - रसायन विज्ञान विभाग

डॉ. मित्तल ने जल उपचार और अवशोषण में महत्वपूर्ण अनुसंधान किया है। उनके शोध ने पर्यावरण सुरक्षा और जल संसाधन प्रबंधन में नई दिशाएं खोली हैं।

डॉ. टिकेंद्र नाथ वर्मा - मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग

थर्मल इंजीनियरिंग, डीजल इंजन, बायोडीजल और धुआं जैसे क्षेत्रों में उनका काम ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है।

डॉ. वरुण बजाज - इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग विभाग

डॉ. बजाज बायोमेडिकल सिग्नल प्रोसेसिंग, हेल्थकेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस और पैटर्न रिकॉग्निशन में विशेषज्ञता रखते हैं। उनके शोध ने चिकित्सा के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दिया है।

डॉ. फोजिया जेड हक - भौतिकी विभाग

नैनोटेक्नोलॉजी, नैनोमटेरियल्स, सोलर सेल्स, ऑप्टिकल गैस सेंसर और सॉलिड स्टेट आयनिक्स में उनके शोध को दुनिया भर में पहचान मिली है। यह उनके समर्पण और कठिन परिश्रम का नतीजा है कि वे लगातार पांच वर्षों से इस सूची में स्थान बनाए हुए हैं।

डॉ. विजय भास्कर सेमवाल - कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग

डॉ. सेमवाल डीप लर्निंग, मशीन लर्निंग, ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स और पैटर्न मान्यता में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनका शोध आधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है।

डॉ. प्रशांत बरेदार - ऊर्जा केंद्र

सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जैव ऊर्जा प्रणाली में उनके शोध ने ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों पर अनुसंधान को नई दिशा दी है।

डॉ. गौरव द्विवेदी - ऊर्जा केंद्र

डॉ. द्विवेदी अक्षय ऊर्जा, आईसी इंजन, जैव ईंधन और ऊर्जा प्रणाली के क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखते हैं और ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उनके शोध महत्वपूर्ण हैं।

डॉ. जे.एल. भगोरिया - मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उनके शोध कार्य ने मैनिट को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।

डॉ. राजेश पुरोहित - मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग

नैनो कंपोजिट, रैपिड प्रोटोटाइपिंग और ऑटोनॉमस ड्राइविंग के क्षेत्र में उनका काम अभिनव और क्रांतिकारी है।

डॉ. रमेश कुमार नायक - सामग्री और धातुकर्म इंजीनियरिंग

धातु कास्टिंग और प्रक्रिया सिमुलेशन के क्षेत्र में उनका योगदान महत्वपूर्ण है।

डॉ. पीयूष पटेल - भौतिकी विभाग

पतली फिल्म संश्लेषण, सौर ऊर्जा और कार्यात्मक सामग्री में उनके अनुसंधान ने उन्नत सामग्री विज्ञान में मैनिट की प्रतिष्ठा को और बढ़ाया है।

मैनिट के वैज्ञानिकों का वैश्विक योगदान

मैनिट के ये वैज्ञानिक केवल भारतीय वैज्ञानिक समुदाय में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अनुसंधान और नवाचार में योगदान दे रहे हैं। इनके शोध विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी हैं और ये अनुसंधान समाज के कई पहलुओं को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे हैं।

डॉ. फोजिया जेड हक और डॉ. ज्योति मित्तल जैसे वैज्ञानिकों का लगातार पांच वर्षों तक शीर्ष 2 प्रतिशत सूची में शामिल रहना मैनिट के लिए गर्व का विषय है। यह दर्शाता है कि संस्थान में न केवल अनुसंधान के क्षेत्र में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं, बल्कि मैनिट भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

अनुसंधान में मैनिट का भविष्य

मैनिट के वैज्ञानिकों का यह समर्पण और दृढ़ता संस्थान को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में मदद कर रही है। अनुसंधान और नवाचार में उनकी भूमिका केवल अकादमिक और वैज्ञानिक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका काम उद्योग और समाज को भी लाभान्वित कर रहा है।

इस उपलब्धि के साथ, मैनिट अपने शोधकर्ताओं के उत्कृष्ट कार्यों का जश्न मना रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि आने वाले समय में भी संस्थान विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करता रहे।

देश को मिली नई पहचान 

मैनिट के 12 प्रमुख शोधकर्ताओं की स्टैनफोर्ड की शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल होने की उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह वैश्विक विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है। इनके शोध ने न केवल संस्थान को बल्कि देश को भी नई पहचान दी है। 

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