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स्ट्रक्चरल इक्वेशन मॉडलिंग कार्यशाला में 28 प्रतिभागी करेंगे डेटा विश्लेषण में महारत हासिल

मैनिट में पांच दिवसीय स्ट्रक्चरल इक्वेशन मॉडलिंग कार्यशाला में देश भर से आए प्रतिभागी

भोपाल। मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) और इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स इंडिया (आईटीपीआई) मध्य प्रदेश चैप्टर के सहयोग से आईटीपीआई के माता मंदिर परिसर में स्ट्रक्चरल इक्वेशन मॉडलिंग (एसईएम) पर पांच दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ रविवार को किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य शोधकर्ताओं, छात्रों और पेशेवरों को संरचनात्मक समीकरण मॉडलिंग (एसईएम) तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना है, जिससे वे विभिन्न क्षेत्रों में डेटा विश्लेषण को और अधिक प्रभावी ढंग से कर सकें। 

इस पांच दिवसीय हैंड्स-ऑन वर्कशॉप में पूरे भारत से आए 28 प्रतिभागियों ने भाग लिया।प्रतिभागियों में योजना, मानविकी, सामाजिक विज्ञान, व्यवसाय प्रबंधन आदि विभिन्न क्षेत्रों के शोधकर्ता, विद्वान, छात्र और पेशेवर शामिल हैं। कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य इन प्रतिभागियों के डेटा विश्लेषण कौशल को उन्नत करना है, ताकि वे संरचनात्मक समीकरण मॉडलिंग की मदद से अपने संबंधित क्षेत्रों में अधिक सटीक और प्रभावी शोध कार्य कर सकें।


कार्यशाला के उद्देश्यों पर विशेष ध्यान

इस कार्यशाला का आयोजन मैनिट के आर्किटेक्चर और योजना विभाग के डॉ. बुलबुल शुक्ला, प्रोफेसर विक्की लालरामसंगी और प्रोफेसर नवीन पराशर द्वारा किया गया है। जिनका सहयोग टीपी संदीप श्रीवास्तव द्वारा किया गया। कार्यशाला के आयोजन का प्रमुख उद्देश्य प्रतिभागियों को एसईएम जैसी जटिल तकनीकों के व्यावहारिक अनुप्रयोग सिखाना है। एसईएम एक सांख्यिकीय तकनीक है, जिसका उपयोग विभिन्न मॉडलों के बीच अंतर्निहित संरचनाओं को समझने और संबंधों का सत्यापन करने के लिए किया जाता है। 

स्ट्रक्चरल इक्वेशन मॉडलिंग शोधकर्ताओं और डेटा एनालिस्ट के लिए अत्यधिक उपयोगी होता है, क्योंकि यह एक ही समय में कई परिकल्पनाओं का परीक्षण करने की अनुमति देता है। इस तकनीक के माध्यम से डेटा विश्लेषण में जटिलता को कम करते हुए सटीक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं, जिससे व्यवसाय प्रबंधन, मानविकी, समाजशास्त्र और शहरी योजना जैसे क्षेत्रों में इसे एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में देखा जाता है।

कार्यशाला के प्रमुख आकर्षण

पांच दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को संरचनात्मक समीकरण मॉडलिंग के सिद्धांतों से लेकर उनके वास्तविक जीवन में उपयोग के विभिन्न पहलुओं तक की जानकारी दी जाएगी। इस दौरान प्रतिभागी सॉफ्टवेयर आधारित उपकरणों और तकनीकों का प्रयोग कर वास्तविक डेटा का विश्लेषण और सत्यापन करने की प्रक्रिया सीखेंगे। कार्यशाला में शोधकर्ताओं को जटिल डेटा सेट के विश्लेषण के साथ-साथ उनके बीच के संबंधों को समझने के लिए एसईएम का उपयोग कैसे किया जाए, इस पर विशेष जोर दिया जाएगा। 

कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में एसईएम के सिद्धांत, सॉफ्टवेयर का परिचय, मॉडल फिटिंग, डेटा कलेक्शन, मॉडल वैलिडेशन आदि शामिल हैं। प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव के साथ-साथ विभिन्न केस स्टडीज पर आधारित परियोजनाओं को भी हल करने का मौका मिलेगा। यह कार्यशाला शोधकर्ताओं के लिए न केवल डेटा विश्लेषण की क्षमता को बढ़ाने का एक अच्छा अवसर है, बल्कि एसईएम तकनीक के विभिन्न अनुप्रयोगों को समझने का भी महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा। 


प्रतिभागियों के अनुभव और भविष्य की संभावनाएं

इस कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिभागी अपने अनुभवों को साझा करते हुए इसे बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक मान रहे हैं। एक प्रतिभागी ने बताया यह कार्यशाला मुझे अपने शोध कार्य में एसईएम के उपयोग के लिए एक स्पष्ट दिशा प्रदान कर रही है। विभिन्न सत्रों में मैंने एसईएम की तकनीकी और सैद्धांतिक समझ प्राप्त की है, जिससे मैं अपने शोध को और अधिक सटीक और व्यापक बना सकूंगा।

कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों को न केवल संरचनात्मक समीकरण मॉडलिंग के सिद्धांतों की गहन जानकारी मिलेगी, बल्कि वे व्यावहारिक रूप से इन तकनीकों का उपयोग करके डेटा का विश्लेषण और सत्यापन करने में भी सक्षम होंगे। इससे उन्हें उनके शोध कार्य में एक नया दृष्टिकोण प्राप्त होगा, जो उन्हें उनके संबंधित क्षेत्रों में बेहतर परिणाम प्राप्त करने में मदद करेगा।

प्रतिभागियों को प्रदान किए जाएंगे प्रमाणपत्र 

कार्यशाला के समापन पर, सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। इसके साथ ही उन्हें मैनिट और आईटीपीआई द्वारा संरचनात्मक समीकरण मॉडलिंग में भविष्य के विभिन्न अवसरों और संभावनाओं पर चर्चा करने का भी मौका मिलेगा। इस तरह के आयोजनों से शोधकर्ताओं और छात्रों को न केवल उनके शोध कार्य में मदद मिलेगी, बल्कि उनके पेशेवर करियर को भी नया आयाम मिलेगा। मैनिट और आईटीपीआई द्वारा इस तरह के ज्ञानवर्धक और व्यावहारिक कार्यक्रमों का आयोजन भविष्य में भी जारी रहेगा, जिससे देशभर के शोधकर्ताओं और पेशेवरों को लाभ होगा। 

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