भोपाल। राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2024 के अंतर्गत शनिवार को पक्षी अवलोकन शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों और पर्यावरण प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शिविर में सेम कॉलेज और महात्मा गांधी महाविद्यालय के कुल 46 प्रतिभागियों शामिल हुए। इस दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न पक्षियों और तितलियों की प्रजातियों का अवलोकन किया, जिसने सभी को प्रकृति के प्रति गहरा संबंध महसूस करने का अवसर दिया।
इस शिविर के दौरान प्रतिभागियों ने कोयल, पर्पल हेरॉन, ग्रे-हेरॉन, नाईट हेरॉन, ब्लैक रेड स्टार्ट, पर्पल सनबर्ड, कॉमन किंगफिशर और स्पॉटेड डच जैसी पक्षियों की विविध प्रजातियों के देखा। पक्षियों की इन खूबसूरत प्रजातियों को देखकर सभी प्रतिभागी रोमांचित हो उठे। पक्षी अवलोकन के इस अनुभव ने न केवल विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन में सहायता की, बल्कि उन्हें पक्षी संरक्षण के महत्व को भी समझने का मौका दिया।
तितलियों में लाईम बटरफ्लाई, कॉमन क्रो, ग्रे-पेनसी, कॉमन ग्रास यलो, ब्लू टाईगर, स्ट्राइप्ड टाईगर, प्लेन टाईगर और कॉमन ईवनिंग ब्राउन जैसी विभिन्न तितली प्रजातियों का अवलोकन किया गया। इन रंग-बिरंगी तितलियों ने प्रकृति की सुंदरता को और अधिक निखार दिया। सभी प्रतिभागी इन प्रजातियों को देखकर खासे उत्साहित हुए और उन्होंने इनके संरक्षण की जरूरत पर बल दिया।
इस अवसर पर पक्षी विशेषज्ञों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अधिकारियों ने प्रतिभागियों को पक्षी अवलोकन के दौरान पक्षियों की आदतों, उनकी उड़ान के तरीके और उनके निवास स्थान की आवश्यकता पर जानकारी दी। इस शिविर में स्रोत व्यक्ति के रूप में डॉ. सुदेश वाघमारे, डॉ. संगीता राजगीर और मो. खालिक मौजूद रहे, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा के महत्व पर अपने विचार साझा किए। वन विहार के सहायक संचालक एसके सिन्हा ने कार्यक्रम का संचालन किया।
वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत सिर्फ पक्षी अवलोकन ही नहीं, बल्कि छात्रों की रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए भी विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। सुबह 10 बजे से 'वन्यजीव थीम' पर विद्यालयीन और महाविद्यालयीन वर्ग के लिए मेंहदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें 78 प्रतिभागियों ने भाग लिया। छात्रों ने वन्यजीवों के संरक्षण की थीम पर आधारित सुंदर डिजाइन बनाए, जिसने उनकी कलात्मकता को उजागर किया और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी समझ को दिखाया।
इसके बाद सुबह 11 बजे से 'वन्यजीवन के लिए जलवायु परिवर्तन, रहवास की कमी से ज्यादा बड़ा खतरा है' विषय पर शिक्षक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का सहयोग डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया ने किया और इसमें 18 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने जलवायु परिवर्तन और वन्यजीव संरक्षण के आपसी संबंध पर गहन विचार-विमर्श किया, जिससे सभी उपस्थित लोगों को इस गंभीर मुद्दे पर सोचने का अवसर मिला। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने जलवायु परिवर्तन के कारण वन्यजीवों के अस्तित्व को हो रहे खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाई और इसके समाधान पर अपने विचार व्यक्त किए।
दोपहर 12 बजे से 'वन्यजीव थीम' पर विद्यालयीन और महाविद्यालयीन वर्ग के लिए पॉम पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें 81 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। छात्रों ने अपने हाथों के प्रिंट का उपयोग करके वन्यजीवों की विभिन्न छवियों को कैनवस पर उकेरा, जिससे न केवल उनकी कलात्मकता दिखी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी गंभीरता भी झलकी।
यह आयोजन न केवल कला, साहित्य और वैज्ञानिक समझ का मिश्रण था, बल्कि इसमें पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किया गया एक प्रेरणादायक कदम भी था। राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2024 ने एक बार फिर साबित किया कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सभी वर्गों का सहयोग आवश्यक है।
पक्षी अवलोकन शिविर और विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों और प्रतिभागियों को न केवल वन्यजीवों की अनमोलता समझने का मौका मिला, बल्कि उन्हें यह भी अहसास हुआ कि वन्यजीव संरक्षण के बिना पृथ्वी का संतुलन बनाए रखना कठिन है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने और युवाओं को इस दिशा में प्रेरित करने का उद्देश्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
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