भोपाल। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, विश्व रंग के निदेशक, वरिष्ठ कवि - कथाकार संतोष चौबे को प्रतिष्ठित 'राष्ट्रीय शताब्दी सम्मान–2024' से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति द्वारा आयोजित भव्य एवं गरिमामय समारोह में उन्हें एक लाख रुपये की सम्मान निधि, मानपत्र, शॉल और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। इस आयोजन ने न केवल श्री चौबे के साहित्यिक योगदान को सराहा, बल्कि उनकी वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रसार में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर किया।
यह सम्मान समारोह इंदौर में आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि माधव कौशिक, अध्यक्ष, साहित्य अकादमी, दिल्ली, इंदौर के लोकसभा सांसद शंकर ललवानी और वरिष्ठ साहित्यकार सत्यनारायण सत्तन सहित कई प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया। श्री चौबे को सम्मानित करते हुए समिति के प्रधानमंत्री अरविंद जवलेकर ने उनके समर्पण और हिंदी भाषा की सेवा के प्रति अद्वितीय योगदान की सराहना की।
संतोष चौबे का साहित्यिक जीवन चार दशकों से अधिक का है, जिसमें उन्होंने कविता, कथा साहित्य, आलोचना, उपन्यास और अनुवाद के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी प्रमुख कृतियों में कविता संग्रह "कहीं और सच होंगे सपने", आलोचना ग्रंथ "कला की संगत", उपन्यास "जलतरंग", और अनुवाद "मास्को डायरी" शामिल हैं। उनकी साहित्यिक प्रतिभा के लिए उन्हें मध्य प्रदेश साहित्य परिषद् का दुष्यंत कुमार पुरस्कार, स्पंदन आलोचना सम्मान, शैलेश मटियानी सम्मान और अंतरराष्ट्रीय वैली ऑफ वर्ड्स पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं।
साहित्यिक अवदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय दुष्यंत एवं शिवमंगल सिंह सुमन अलंकरण से भी सम्मानित किया गया है। इन सम्मानों के माध्यम से उन्होंने साहित्य जगत में एक विशिष्ट पहचान बनाई है, जो न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराही जाती है।
संतोष चौबे ने हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रसार के उद्देश्य से कई नवाचार किए हैं। उनकी पहल पर 2019 में भोपाल से शुरू किया गया 'विश्वरंग' महोत्सव आज 50 से अधिक देशों में मनाया जाता है। यह महोत्सव वैश्विक स्तर पर हिंदी साहित्य, कला और संस्कृति के प्रचार-प्रसार का एक प्रमुख मंच बन गया है।
हाल ही में, उन्होंने मॉरीशस में 'विश्व रंग' का भव्य आयोजन किया, जिसमें विश्व के कई प्रमुख साहित्यकारों और कलाकारों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन ने हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति के प्रचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी इन उपलब्धियों के लिए उन्हें सिंगापुर में 'विश्व हिंदी शिखर सम्मान–2024' और फ्रांस में प्रतिष्ठित 'भारत गौरव सम्मान–2024' से भी सम्मानित किया गया है। इसके पूर्व, लंदन में उन्हें 'वातायन यूके अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मान–2023' और अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा 'लाईफटाइम एचीवमेंट अवार्ड–2023' से नवाजा गया था।
इंदौर में आयोजित सम्मान समारोह में हिंदी साहित्य जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। इस अवसर पर साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष और पद्मश्री डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को भी 'शताब्दी सम्मान–2024' से सम्मानित किया गया। डॉ. तिवारी गोरखपुर के प्रख्यात साहित्यकार हैं और उनका योगदान हिंदी साहित्य में अद्वितीय है।
समारोह में टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र के निदेशक डॉ. जवाहर कर्नावट, टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केंद्र के निदेशक विनय उपाध्याय और वनमाली सृजन पीठ की राष्ट्रीय संयोजक ज्योति रघुवंशी ने भी श्री चौबे का अभिनंदन किया। शॉल और माल्यार्पण कर उन्हें सम्मानित किया गया।
इस मौके पर डॉ. पद्मा सिंह, हरेराम वाजपेयी, डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह, सदाशिव कौतुक, कृष्ण कुमार अष्ठाना और घनश्याम यादव सहित कई साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों ने अपनी रचनात्मक उपस्थिति दर्ज कराई।
संतोष चौबे ने अपने साहित्यिक जीवन में अनेक नवाचार किए हैं। उनकी रचनाएं केवल साहित्यिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं, सामाजिक बदलाव और विकासशीलता पर भी केंद्रित होती हैं।
उनकी पहल पर 'विश्वरंग' महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य हिंदी साहित्य और भारतीय कला-संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाना है। उन्होंने अपने जीवन में न केवल हिंदी साहित्य के विकास में योगदान दिया है, बल्कि नए साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने और हिंदी को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विश्वरंग के आयोजन से भारत के बाहर भी हिंदी साहित्य का प्रचार-प्रसार हुआ है। उनके नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव ने भारत के साहित्यिक इतिहास में एक नई क्रांति की शुरुआत की है, जिसमें कई देशों ने भागीदारी की और हिंदी साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति की गूंज दूर-दूर तक पहुंचाई।
संतोष चौबे का साहित्य और हिंदी के प्रति समर्पण उन्हें और ऊंचाइयों तक ले जाएगा। उनके नवाचार और अद्वितीय योगदान से हिंदी साहित्य को एक नई दिशा मिली है, जो भविष्य में और अधिक विकसित होने की संभावना रखती है। उनके इस योगदान के लिए उन्हें मिला 'राष्ट्रीय शताब्दी सम्मान–2024' उनके साहित्यिक जीवन का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है।
संतोष चौबे को 'राष्ट्रीय शताब्दी सम्मान–2024' से सम्मानित किए जाने से हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनकी भूमिका को व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है। उनकी साहित्यिक उपलब्धियां और नवाचार भविष्य के साहित्यकारों और उद्यमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी। हिंदी भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में उनका योगदान अतुलनीय है।
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