भोपाल। स्वच्छता पखवाड़ा अभियान के तहत ईदगाह स्थित गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के क्षेत्रीय श्वसन रोग संस्थान में सफाई अभियान चलाया गया। इस मौके पर अधीक्षक डॉ. रतन कुमार, विभागाध्यक्ष डॉ. निशांत श्रीवास्तव, डॉ. पराग शर्मा, डॉ. आरके जैन सहित अस्पताल के कई डॉक्टर, कर्मचारी और स्वच्छता मित्रों ने मिलकर परिसर की साफ-सफाई की। अस्पताल परिसर को साफ-सुथरा रखने की दिशा में किए गए इस प्रयास की सभी ने सराहना की।
इस मौके पर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. रतन कुमार ने सभी डॉक्टरों, कर्मचारियों और स्वच्छता मित्रों को संबोधित करते हुए स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल बीमारी से छुटकारा दिलाने में ही सहायक नहीं होती, बल्कि यह व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी सशक्त बनाती है। जब हम अपने आस-पास की अनावश्यक और स्वास्थ्य को हानि पहुंचाने वाली चीजों को साफ करते हैं, तो हम न केवल बीमारियों से बचते हैं, बल्कि वातावरण में भी ताजगी का अनुभव होता है। इससे मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो व्यक्ति को बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद करती है।
डॉ. रतन कुमार ने कहा स्वच्छता हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। अगर हम स्वच्छ वातावरण में रहते हैं तो न केवल हम बीमारियों से बचे रहते हैं, बल्कि हमारे अंदर आत्मविश्वास भी बढ़ता है। इसके द्वारा हम सकारात्मक सोच विकसित कर सकते हैं और जीवन के किसी भी क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। इसलिए, स्वच्छता की आदतों को अपनाना बहुत महत्वपूर्ण है।
अस्पताल प्रशासन ने इस अभियान के अंतर्गत स्वच्छता मित्रों के लिए एक विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने का भी निर्णय लिया है। इस शिविर में उन स्वच्छता मित्रों की स्वास्थ्य परिक्षण किया जाएगा तो दिन-रात मेहनत करके शहर को साफ सुथरा रखते हैं। यह पहल स्वच्छता मित्रों के योगदान को पहचानने और उनकी देखभाल के उद्देश्य से की गई है। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि स्वस्थ शरीर में ही मन स्वस्थ्य रहता है और स्वच्छता मित्रों की सेहत का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है।
अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस अवसर पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में स्वच्छता बनाए रखना एक सामूहिक प्रयास है और इसमें हर व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण है। स्वच्छता केवल बाहरी सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें व्यक्ति का मानसिक और आध्यात्मिक स्वच्छता भी शामिल है। उन्होंने कहा कि हमें इस अभियान को केवल एक बार का कार्यक्रम मानकर नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
डॉ. निशांत श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा कि स्वच्छता का सीधा संबंध हमारे स्वास्थ्य से है। जब हम साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं, तो हम न केवल बीमारियों से दूर रहते हैं, बल्कि हमारा शरीर भी स्वस्थ रहता है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण में रहने से हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली भी मजबूत होती है और हम शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहते हैं। इसके अलावा स्वच्छता से मन की शांति और ताजगी मिलती है, जो हमें दिनभर की थकान से मुक्त करती है।
डॉ. पराग शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि स्वच्छता का अभ्यास केवल वयस्कों तक सीमित नहीं होना चाहिए। हमें अपने बच्चों को भी कम उम्र से ही स्वच्छता के प्रति जागरूक करना चाहिए। अगर हम बच्चों को सफाई करने की आदत डालते हैं, तो वे बड़े होकर भी इन आदतों को अपनाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामुदायिक जिम्मेदारी भी है। जब हम सामूहिक रूप से स्वच्छता की ओर कदम बढ़ाते हैं, तो समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।
अस्पताल परिसर में स्वच्छता अभियान के दौरान सभी कर्मचारियों और स्वच्छता मित्रों ने जोर-शोर से भाग लिया। अभियान के दौरान अस्पताल के हर कोने की साफ-सफाई की गई, जिससे वातावरण में ताजगी और स्वच्छता का अनुभव हुआ। इस अवसर पर अधीक्षक डॉ. रतन कुमार ने कहा स्वच्छता से न केवल हमारा शरीर बल्कि हमारा मन भी स्वस्थ रहता है। जब हम स्वच्छ और साफ-सुथरे वातावरण में होते हैं, तो हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो हमें जीवन के बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता के प्रति जागरूक होना और इसे अपने जीवन में अपनाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। यह अभियान हमें यह सिखाता है कि हम अपनी जिम्मेदारियों को न केवल अपने लिए, बल्कि समाज के लिए भी निभाएं। अस्पताल प्रशासन ने सभी कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे इस स्वच्छता पखवाड़ा को सफल बनाएं और इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।
स्वच्छता पखवाड़ा के तहत गांधी मेडिकल कॉलेज में आयोजित यह अभियान एक प्रेरणादायक पहल है, जो अस्पताल के कर्मचारियों, डॉक्टरों और स्वच्छता मित्रों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का काम करता है। यह अभियान हमें यह सिखाता है कि स्वच्छता केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। स्वच्छता के प्रति हमारी जागरूकता और प्रयास ही हमें स्वस्थ और खुशहाल जीवन की ओर ले जाते हैं। इस तरह की पहलें समाज में स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगी।
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