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डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव "प्रियांजलि" को एक माह में मिले दो प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान

उत्तर प्रदेश में आयोजित कवि सम्मेलन में राष्ट्रीय शब्दाक्षर प्रतीक चिन्ह देकर किया सम्मानित, साहित्यिक कुंभ में देश के 25 राज्यों से शामिल हुए 120 साहित्यकार

भोपाल। राजधानी की उभरती कवयित्री डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव ”प्रियांजलि” ने अपनी साहित्यिक यात्रा के प्रारंभ में ही उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की हैं। उन्हें एक ही माह में दो महानगरों में प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिससे उनका नाम साहित्यिक जगत में तेजी से उभर रहा है।

डॉ. प्रियंका ”प्रियांजलि” को उत्तर प्रदेश में आयोजित एक कवि सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय शब्दाक्षर प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया गया। इस सम्मेलन में देशभर से आमंत्रित प्रख्यात साहित्यकारों की उपस्थिति में उन्हें शॉल एवं पुष्पमाला से भी अलंकृत किया गया। शब्दाक्षर संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप ने बताया कि इस साहित्यिक कुंभ में देश के 25 राज्यों से 120 साहित्यकारों ने भाग लिया और सभी साहित्यकारों को अयोध्या दर्शन भी करवाए गए। डॉ. प्रियंका की रचनाओं को वरिष्ठ साहित्यकारों ने काफी सराहा, जिससे यह सम्मान उनकी साहित्यिक प्रतिभा की स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है। 


इससे पूर्व, हिंदी दिवस के अवसर पर भोपाल के हिंदी भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में डॉ. प्रियंका ”प्रियांजलि” को निर्भया साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया। उनकी समसामयिक और संवेदनशील रचनाओं ने साहित्यिक समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है और उनके द्वारा लिखी गई कविताओं ने समाज में व्याप्त मुद्दों को गहराई से उजागर किया है।

डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव "प्रियांजलि" की साहित्यिक यात्रा भले ही अभी प्रारंभिक अवस्था में है, लेकिन उनकी रचनाओं में निहित गहन विचारधारा और समकालीन मुद्दों पर आधारित उनकी कविताएं उन्हें विशेष पहचान दिला रही हैं। उनकी उपलब्धियों के पीछे उनकी प्रतिबद्धता और साहित्यिक समर्पण का महत्वपूर्ण योगदान है।

हिंदी के उन्नयन का संकल्प
अपनी इस उपलब्धि पर डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव "प्रियांजलि" ने सभी साहित्यकारों, गुरुजनों और साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि उनकी रचनात्मकता का मुख्य उद्देश्य राजभाषा हिंदी के उन्नयन के लिए कार्य करना है। डॉ. प्रियंका का मानना है कि हिंदी का व्यापक प्रचार-प्रसार आज के समय की आवश्यकता है, और इसके लिए न केवल हिंदी भाषी क्षेत्रों में, बल्कि गैर-हिंदी राज्यों में भी लोगों को हिंदी से जोड़ना आवश्यक है।


उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में ऐसे साहित्यिक मंच तैयार किए जाने चाहिए, जो हिंदी साहित्य के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाएं। उन्होंने यह संकल्प लिया कि वह नवांकुर साहित्य मनीषियों को हिंदी भाषा में सृजन के लिए प्रेरित करेंगी, ताकि हिंदी साहित्य की धरोहर को और समृद्ध किया जा सके।

साहित्यिक योगदान को मान्यता
डॉ. प्रियंका की रचनाओं को जिस प्रकार से सराहा जा रहा है, उससे यह स्पष्ट है कि उनका साहित्यिक सफर लंबे समय तक जारी रहेगा और हिंदी भाषा में उनका योगदान महत्वपूर्ण साबित होगा। उनके द्वारा लिखी गई कविताओं में जहां एक ओर समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता झलकती है, वहीं दूसरी ओर वे सामाजिक और समसामयिक मुद्दों को बड़े ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

इस प्रकार, डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव "प्रियांजलि" का साहित्यिक सफर प्रेरणादायक है और हिंदी भाषा के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि वे भविष्य में भी हिंदी साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देती रहेंगी।

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