भोपाल। मैनिट स्पिकमैके हेरिटेज क्लब में एक अद्वितीय रंगमंचीय प्रस्तुति का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य भारतीय कला और संस्कृति को युवाओं के बीच बढ़ावा देना था। इस आयोजन में हबीब तनवीर द्वारा रचित और प्रतिष्ठित लोक कलाकार रामचंद्र सिंह एवं उनके समूह द्वारा प्रस्तुत 'चरणदास चोर' नाटिका ने दर्शकों को पूरी तरह से मोहित कर दिया। यह प्रस्तुति भारत की पारंपरिक लोक रंगमंच की समृद्ध धरोहर को प्रदर्शित करने के साथ-साथ, सत्य और ईमानदारी जैसे महत्वपूर्ण मूल्यों को सशक्त तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास था।
'चरणदास चोर' नाटक का निर्माण प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक हबीब तनवीर द्वारा किया गया था और यह उनके 'नया थियेटर' की अमूल्य कृति मानी जाती है। यह नाटक मूल रूप से छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों और पारंपरिक नृत्यों एवं गीतों का संगम है, जो अपने सरल लेकिन गहरे संदेशों के लिए प्रसिद्ध है। मैनिट में हुए इस आयोजन में मुख्य भूमिका निभाने वाले रामचंद्र सिंह ने ग्रामीण छत्तीसगढ़ के अत्यंत प्रतिभाशाली कलाकारों के साथ इस नाटिका को मंच पर जीवंत कर दिया।
रामचंद्र सिंह ने बिहार के विभिन्न पारंपरिक और लोक नाट्य रूपों जैसे नटुआ नाच, बिदापत, झरकी नृत्य और कीर्तनिया की शिक्षा ली है, जिसने उनके प्रदर्शन को एक अनूठी गहराई प्रदान की। उनकी पारंपरिक परिधान, हाव-भाव, संगीत और अभिव्यक्ति ने नाटक के हर पहलू को और भी प्रभावी बना दिया। उनके साथ मंच पर धन्नुलाल सिन्हा, मनहरण गंधर्व, अमर सिंह गंधर्व, राहुल जाधव, इमरान अली, सतीश व्याम, और अन्य कई प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समा बांधा।
नाटक की कहानी चरणदास के सोने की प्लेट चोरी करने से शुरू होती है। चरणदास एक गांव से सोने की थाली चोरी करके फरार है ,जिसके पीछे पुलिस लगी हुई है। पुलिस से बचने के लिए या यूं कहे पुलिस को चकमा देने के लिए, चरणदास एक गुरुजी के आश्रम में प्रवेश करता हैं और गुरुजी का शिष्य बनने की इच्छा व्यक्त करता है। गुरुजी मान जाते हैं, लेकिन इस शर्त पर कि चरणदास हमेशा सच बोलने का प्रण ले। गुरु जी कहते हैं कि "ये चार प्रण तो तुमने अपने मन से किया है, एक बात गुरु जी का भी मान लो। चरणदास पूछता है कि कौन सी बात ? गुरु जी कहते हैं कि झूठ बोलना छोड़ दो। चरणदास पहले तो इस प्रण के लिए ना -नुकुर करता है, लेकिन पुलिस से बचने के चक्कर मे पांचवां प्रण करता है मैं कभी झूठ नही बोलूंगा "चरणदास के इन्ही वचनों पर पूरे कथानक का ताना-बाना है ,जो एक एक करके उसकी जिंदगी में सामने आते हैं और चरणदास अपने वचनों के निर्वहन में मरते दम तक खरा उतरता है।
लोक संगीत और नृत्य की अद्भुत समा
नाटक के दौरान कलाकारों ने पारंपरिक लोक संगीत और नृत्य का भी प्रदर्शन किया, जिसने कार्यक्रम को और भी भव्य बना दिया। कलाकारों के समूह ने अपने नृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और समांजस्य से श्रोताओं के मन को जीत लिया। रामचंद्र सिंह और उनकी टीम ने रंगमंच की परंपराओं को सजीव करने के साथ ही, नृत्य और संगीत की प्रस्तुति से भी दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
समारोह का प्रमुख आकर्षण चरणदास की ईमानदारी और उसकी समाज में व्याप्त धारणाओं के प्रति विरोधाभास को दर्शाने वाले दृश्य थे। नाटक में गांववालों की सादगी और समाज में व्याप्त कठिनाइयों को दिखाया, जो कहीं न कहीं आज के समाज में भी प्रासंगिक हैं। नाटक के माध्यम से कलाकारों ने श्रोताओं तक ईमानदारी, सत्य, गुरुभक्ति और सामाजिक दायित्वों जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाया।
समारोह के दौरान प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, जो इस बात का प्रतीक था कि नाटक ने दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी। श्रोताओं ने कलाकारों की मेहनत और प्रतिभा की भरपूर सराहना की। कई दर्शकों ने कहा कि नाटक ने उन्हें न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि जीवन के गहरे सत्य और मूल्यों के बारे में सोचने पर भी मजबूर किया।
मैनिट स्पिकमैके हेरिटेज क्लब ने भारतीय कला और संस्कृति को युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। क्लब ने हमेशा से ही भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित और बढ़ावा देने के प्रयास किए हैं। इस बार के आयोजन ने यह साबित किया कि पारंपरिक रंगमंच और लोक कला आज भी युवाओं के बीच उतनी ही प्रासंगिक और प्रभावशाली है।
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