भोपाल। मध्य प्रदेश शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राज्य स्तरीय कला उत्सव का उद्घाटन भोपाल में हुआ। यह उत्सव इस वर्ष 'विकसित भारत 2047: एक व्यापक दृष्टिकोण' की थीम पर आधारित है। इसमें स्कूली विद्यार्थियों ने गायन, वादन, नृत्य, नाट्य, कहानी वाचन, चित्रकला, मूर्तिकला और स्थानीय शिल्प जैसी विभिन्न उप-श्रेणियों में अपनी कला का प्रदर्शन किया।
इस कला उत्सव का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या 2023 के व्यापक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों की कला प्रतिभा को मंच प्रदान करना है। सन् 2015 से प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले इस कला उत्सव का मुख्य उद्देश्य बच्चों की सृजनात्मकता और सांस्कृतिक धरोहर को प्रोत्साहन देना है।
राज्य स्तरीय कला उत्सव का उद्घाटन मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध तबला गुरु पंडित किरण देशपांडे ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। इस अवसर पर कला जगत के अन्य प्रतिष्ठित हस्तियों जैसे प्रवीण शेवलीकर और पंडित अभय की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
उद्घाटन समारोह के दौरान, प्रदेश के सभी नौ संभागों के स्कूली विद्यार्थियों ने अपने-अपने क्षेत्र की पारंपरिक और लोक कला का अद्वितीय प्रदर्शन किया। निमाड़ का नौरता नृत्य, बुंदेलखंड का बुंदेली नृत्य, महाकौशल का बरेदी नृत्य और मालवा अंचल के जनजातीय नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन प्रस्तुतियों ने मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध कला परंपरा को बेहतरीन तरीके से दर्शाया।
गायन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने मध्य प्रदेश के पारंपरिक लोकगीतों की सामूहिक प्रस्तुति दी, जिसने समां बांध दिया। विद्यार्थियों की सुर और लयबद्धता ने दर्शकों के मन को छू लिया। वादन प्रतियोगिता में तबला, सरोद, सितार और बांसुरी जैसे शास्त्रीय वाद्य यंत्रों पर विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां देखी गईं। इन वाद्य यंत्रों पर विद्यार्थियों के हुनर और तालमेल ने उनकी सृजनात्मकता और शास्त्रीय संगीत के प्रति रुचि को उजागर किया।
इस वर्ष एनसीईआरटी द्वारा 'कहानी वाचन' प्रतियोगिता एक नई थीम के रूप में पेश की गई। विद्यार्थियों ने अपनी अनूठी शैली में कहानियों का वाचन किया, जिसमें बाल मनोविज्ञान, नैतिक मूल्यों और प्रेरक घटनाओं पर आधारित कहानियां शामिल थीं। हर विद्यार्थी ने अपनी कहानी को इस तरह से पेश किया कि दर्शक उस कहानी के साथ जुड़ गए। इस नई थीम ने कहानी वाचन की कला को और अधिक रोचक और प्रासंगिक बना दिया है।
नाट्य विधा में प्रदेश के विभिन्न संभागों के विद्यार्थियों ने महान व्यक्तियों के जीवन और विकसित भारत की संकल्पना पर आधारित नाटकों की प्रस्तुतियां दीं। इन नाटकों ने न केवल इतिहास के महत्वपूर्ण पलों को जीवंत किया, बल्कि भारत के भविष्य के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों की अभिनय क्षमता और उनके जोश ने दर्शकों को प्रेरित किया और कार्यक्रम को ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
कला उत्सव में चित्रकला, मूर्तिकला, स्वदेशी खेल और खिलौने और स्थानीय शिल्प पर आधारित प्रोजेक्ट्स भी शामिल थे। विद्यार्थियों ने अपनी सृजनात्मकता का प्रदर्शन इन माध्यमों के जरिए किया। चित्रकला और मूर्तिकला में विद्यार्थियों ने प्राकृतिक सौंदर्य, भारतीय संस्कृति और सामाजिक मुद्दों को अपनी कृतियों में समाहित किया। स्थानीय शिल्प और स्वदेशी खेलों पर आधारित प्रोजेक्ट्स ने भारतीय ग्रामीण जीवन और कारीगरी की महत्ता को दर्शाया।
दो दिनों तक चलने वाले इस कला उत्सव का समापन आज होगा। जिसमें विभिन्न श्रेणियों में विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया जाएगा। समापन समारोह में नोडल अधिकारी कला उत्सव एवं संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, अरविंद चौरगड़े विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। पुरस्कार वितरण समारोह में विद्यार्थियों के अद्वितीय प्रयासों को सराहा जाएगा और उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
Subscribe to our newsletter for daily updates and stay informed
© indianewsvista.in. All Rights Reserved.