भोपाल। आदर्श योग आध्यात्मिक केंद्र के योग गुरु महेश अग्रवाल ने विश्व हृदय दिवस के अवसर पर हृदय रोगों से बचाव और हृदय को स्वस्थ रखने के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हर साल 29 सितंबर को पूरे विश्व में हृदय दिवस मनाया जाता है, ताकि लोगों को हृदय रोगों से जुड़ी समस्याओं के बारे में जागरूक किया जा सके। वर्तमान में निष्क्रिय जीवनशैली, अत्यधिक तनाव, धूम्रपान, मोटापा और असंतुलित खानपान हृदय रोगों के प्रमुख कारण बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि सही खानपान और नियमित योग एवं प्राणायाम के अभ्यास से हृदय रोगों से बचा जा सकता है।
महेश अग्रवाल ने बताया कि हृदय रोग, जो पहले बुजुर्गों तक सीमित माना जाता था, अब किसी भी उम्र में हो सकता है। महिलाओं में हृदय रोग की संभावना पुरुषों से अधिक होती है, परंतु कई महिलाएं इस जोखिम को नजरअंदाज कर देती हैं। आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और प्रदूषण के कारण हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे रक्त संचार प्रभावित होता है और हृदय को अपनी सामान्य गतिविधियों को संचालित करने में कठिनाई होती है। विश्व हृदय दिवस का उद्देश्य लोगों को हृदय की देखभाल के प्रति जागरूक करना और उन्हें हृदय रोगों के प्रति सचेत करना है।
योग गुरु अग्रवाल ने हृदय को स्वस्थ रखने के लिए योग और प्राणायाम को सबसे प्रभावी उपाय बताया। उन्होंने समझाया कि योग आसनों और प्राणायाम के नियमित अभ्यास से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि मानसिक संतुलन और एकाग्रता भी प्राप्त होती है। प्राणायाम विशेष रूप से श्वास-प्रश्वास की प्रक्रिया को नियंत्रित कर शरीर और मस्तिष्क के बीच संतुलन स्थापित करता है, जो हृदय और अन्य आंतरिक अंगों के लिए लाभकारी है।
अग्रवाल ने बताया कि प्राणायाम में अनुलोम-विलोम का विशेष महत्व है। यह एक ऐसी श्वास प्रक्रिया है, जिसमें नाक के एक छिद्र से श्वास अंदर लिया जाता है और दूसरे से बाहर निकाला जाता है। यह नाड़ी शोधन प्राणायाम कहलाता है, जो दिमाग की गर्मी को नियंत्रित करता है और फेफड़ों को शुद्ध करता है। इसके नियमित अभ्यास से हृदय रोगों के खतरे को कम किया जा सकता है।
उन्होंने भस्त्रिका प्राणायाम का भी महत्व बताया, जिसमें श्वास को धौंकनी की तरह तेजी से अंदर बाहर किया जाता है। यह प्रक्रिया हृदय और फेफड़ों के लिए अत्यंत लाभकारी है। सुबह और शाम इसका अभ्यास करने से शरीर में शक्ति और स्फूर्ति बनी रहती है और रक्त संचार में सुधार होता है।
महेश अग्रवाल ने यह भी बताया कि ध्यान (मेडिटेशन) के माध्यम से मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त की जा सकती है, जो हृदय रोगों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नियमित ध्यान के अभ्यास से तनाव कम होता है और रक्तचाप नियंत्रित रहता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है। ध्यान मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर रोगों से निवारण करने में सहायक होता है, क्योंकि शरीर और मन के बीच का संबंध घनिष्ठ होता है।
योग गुरु ने बताया कि शुद्ध और सात्त्विक आहार, जिसमें ताजे फल, सब्जियां और कम वसा वाला भोजन शामिल होता है, हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि योग और प्राणायाम के साथ-साथ, स्वास्थ्य के प्रति सजग रहकर संतुलित आहार का सेवन करना आवश्यक है।
महेश अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि विश्व हृदय दिवस हृदय के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने का एक प्रमुख माध्यम है। यह दिन लोगों को प्रेरित करता है कि वे अपने हृदय की देखभाल करें और हृदय रोगों से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। योग, प्राणायाम, ध्यान और स्वस्थ आहार को अपनाकर हृदय रोगों से दूर रहना संभव है।
महेश अग्रवाल ने अंत में कहा कि योग और प्राणायाम के नियमित अभ्यास से न केवल हृदय स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि जीवन में शांति, संतुलन और मानसिक स्पष्टता भी आती है। हृदय दिवस के मौके पर सभी को अपने हृदय के प्रति सजग रहना चाहिए और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना चाहिए, ताकि हृदय रोगों से दूर रहकर लंबी और स्वस्थ जीवन यात्रा का आनंद लिया जा सके।
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