कार्यशाला का उद्घाटन मैनिट के निदेशक प्रो. करुणेश कुमार शुक्ला द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने हरित हाइड्रोजन की भूमिका और उसकी संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा हरित हाइड्रोजन न केवल ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा, बल्कि पर्यावरणीय चुनौतियों का भी समाधान प्रस्तुत करेगा। जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में यह ईंधन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रो. शुक्ला ने हरित हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन बताते हुए इसे बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि जैसे-जैसे दुनिया ऊर्जा के स्थायी स्रोतों की ओर बढ़ रही है, हरित हाइड्रोजन एक प्रमुख विकल्प के रूप में उभर रहा है।
सम्मानित अतिथि डॉ. पुनीत वर्मा, जो पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के डिपार्टमेंट ऑफ वाटर एंड एनवायरनमेंटल रेगुलेशन (डीडब्ल्यूईआर) में वरिष्ठ पर्यावरण अधिकारी हैं, ने सतत विकास और हरित हाइड्रोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को इसके अनुप्रयोगों का गहनता से अध्ययन करने और इससे जुड़े अवसरों का पता लगाने के लिए प्रेरित किया।
हरित हाइड्रोजन ऊर्जा के एक स्वच्छ और नवीकरणीय स्रोत के रूप में उभर रहा है। यह हाइड्रोजन गैस को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर, पवन और बायोमास के माध्यम से उत्पन्न करता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन नगण्य होता है। इस तकनीक का इस्तेमाल न केवल ऊर्जा उत्पादन में बल्कि भारी उद्योगों, परिवहन और डीकार्बोनाइजेशन की अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।
कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि हरित हाइड्रोजन जीवाश्म ईंधनों का एक स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है। इसके उपयोग से वैश्विक स्तर पर शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है, जो कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक आवश्यक कदम है। इसके अलावा यह ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, खासकर उन देशों के लिए जो जीवाश्म ईंधनों पर अत्यधिक निर्भर हैं।
इस कार्यशाला में कई प्रख्यात विशेषज्ञ अपने ज्ञान और अनुभव साझा कर रहे हैं। इनमें प्रमुख नामों में डॉ. दिबाकर रक्षित (प्रोफेसर, आईआईटी-दिल्ली), डॉ. पुनीत वर्मा (वरिष्ठ पर्यावरण अधिकारी, डीडब्ल्यूईआर, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया), डॉ. शिवाली सहोता (यूनिवर्सिटी डेगली निकोलो कुसानो, रोम, इटली), डॉ. सौरभ तिवारी (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, एमएनआरई), डॉ. तुषार चौधरी (सहायक प्रोफेसर, आईआईआईटी-डीएम जबलपुर) और डॉ. प्रशांत बारेदार (ऊर्जा केंद्र, मैनिट भोपाल) शामिल हैं।
इन विशेषज्ञों ने हरित हाइड्रोजन के तकनीकी, आर्थिक और पर्यावरणीय पहलुओं पर गहन जानकारी दी। वे इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि कैसे हरित हाइड्रोजन का उत्पादन, भंडारण और उपयोग किया जा सकता है और इसके लिए कौन-कौन सी तकनीकी चुनौतियां और संभावनाएं हैं।
इस कार्यशाला का समन्वयन डॉ. टिकेंद्र नाथ वर्मा, डॉ. गौरव द्विवेदी और डॉ. मीना अग्रवाल कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में यह कार्यशाला प्रतिभागियों को हरित हाइड्रोजन के विभिन्न आयामों से अवगत कराने और इस उभरते क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करने का एक मंच प्रदान कर रही है।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न सत्रों में तकनीकी व्याख्यान, समूह चर्चाएं और प्रायोगिक प्रदर्शन किए जा रहे हैं। यह कार्यक्रम न केवल शैक्षणिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि व्यावहारिक रूप से भी यह प्रतिभागियों को हरित हाइड्रोजन की बारीकियों को समझने में मदद कर रहा है।
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