फिल्मों,

फिल्मों, स्लोगन और नृत्य से गूंजा बाघ संरक्षण का संदेश

बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता, वन्यजीव सप्ताह-2024 के तहत भव्य रैली का आयोजन

भोपाल। वन मंडल भोपाल के तत्वावधान में वन्यजीव सप्ताह-2024 के अंतर्गत एक राज्य स्तरीय बाघ संरक्षण जन जागरण रैली का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य लोगों में बाघों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना था। यह रैली टीटी नगर से मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय तक निकाली गई, जिसमें विभिन्न विभागीय अधिकारी, कर्मचारी, स्कूल और कॉलेज के छात्र-छात्राएं, एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) के 300 सदस्य, एनसीसी (राष्ट्रीय कैडेट कोर) के 600 कैडेट और अनेक एनजीओ के सदस्य शामिल हुए। कुल मिलाकर, लगभग दो हजार प्रतिभागियों ने इस जागरूकता रैली में भाग लिया और बाघ संरक्षण के प्रति अपने समर्थन को व्यक्त किया।

रैली की प्रमुख झलकियां

यह रैली वन एवं प्रचार वाहनों के माध्यम से निकाली गई, जिसमें लाउडस्पीकर पर बाघों से संबंधित फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। साथ ही, स्लोगन, प्रचार पट्टिका और नृत्य कलाकारों के माध्यम से बाघों की सुरक्षा का संदेश दिया गया। प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और नारे लगाए, जिसमें "बाघ बचाओ, जीवन बचाओ" जैसे संदेशों को लोगों तक पहुंचाया गया। यह रैली बाघ संरक्षण के महत्व को दर्शाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था, जो लोगों को न केवल बाघों के अस्तित्व के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास कर रहा है, बल्कि जंगलों और वन्य जीवों की सुरक्षा के प्रति भी प्रेरित कर रहा है।


मध्य प्रदेश: टाइगर स्टेट का गौरव

मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यह राज्य देश में सबसे अधिक बाघों की जनसंख्या का घर है। यह प्रदेश भारत के वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों में एक अग्रणी स्थान रखता है। मध्य प्रदेश के घने जंगल, समृद्ध वनस्पति और विस्तृत राष्ट्रीय उद्यानों ने इसे बाघों के लिए एक आदर्श निवास स्थान बना दिया है। बाघों की बढ़ती संख्या और उनकी सुरक्षा के प्रति राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों ने इसे इस सम्मानित स्थान पर पहुंचाया है।

इस रैली के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि मध्य प्रदेश न केवल बाघों की सबसे बड़ी आबादी का प्रदेश है, बल्कि यह देश का एकमात्र ऐसा राज्य भी है, जहां राजधानी शहर भोपाल में मानव और बाघ दोनों शहरी क्षेत्र में रहते हैं। भोपाल शहर के आसपास के जंगलों में बाघों का बसेरा है और यह अनूठी स्थिति राज्य के लिए गर्व की बात है। इस बात को रैली के माध्यम से बार-बार दोहराया गया कि बाघों का यह सह-अस्तित्व केवल मध्य प्रदेश और भोपाल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।


बाघ संरक्षण का संदेश

रैली में बाघ संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से कई रचनात्मक और प्रभावी तरीके अपनाए गए। नृत्य कलाकारों ने बाघों की शक्ति और स्वतंत्रता को दर्शाते हुए सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जो दर्शकों को बाघों के महत्व और उनकी रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों के प्रति जागरूक कर रही थीं। रैली के दौरान प्रतिभागियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लिए हुए थे, जिन पर बाघों के संरक्षण से जुड़े संदेश लिखे गए थे। इन संदेशों के माध्यम से वन्यजीवों की सुरक्षा, जंगलों की रक्षा और बाघों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया गया।

बाघ संरक्षण के प्रति आम जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से रैली के दौरान फिल्में भी दिखाई गईं। इन फिल्मों में बाघों की जीवनशैली, उनके पर्यावरण पर प्रभाव और बाघों के घटते आवासों से संबंधित समस्याओं को दर्शाया गया। इसके साथ ही, वन्य जीवों के प्रति लोगों को अधिक संवेदनशील बनाने के लिए उन्हें बाघों के संरक्षण के महत्व को समझाने का प्रयास किया गया।


वन विभाग के प्रयास और उपलब्धियां

मध्य प्रदेश वन विभाग ने बाघों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। प्रदेश की सरकार और वन विभाग द्वारा उठाए गए कदमों की वजह से बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। संरक्षण परियोजनाओं, बाघ अभयारण्यों के विस्तार और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के प्रयासों ने प्रदेश को देश में बाघों की संख्या के मामले में पहले स्थान पर पहुंचा दिया है।

भोपाल वन मंडल के अधिकारियों ने बताया कि बाघों के संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाने के इस तरह के आयोजन नियमित रूप से किए जाते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के सभी नागरिकों को बाघों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा के लिए अपना योगदान देना चाहिए। रैली में शामिल विद्यार्थियों, एनएसएस और एनसीसी के सदस्यों ने बाघों के संरक्षण के लिए एकजुट होकर काम करने का संकल्प लिया।


बाघ संरक्षण की दिशा में आगे का रास्ता

मध्य प्रदेश के वन विभाग ने बाघों के संरक्षण के लिए जो कदम उठाए हैं, वे केवल राज्य के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक हैं। यह रैली एक संदेश देती है कि बाघों का संरक्षण केवल सरकार या वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

बाघ भारत के जंगलों के संरक्षक हैं और उनकी उपस्थिति पर्यावरण के संतुलन के लिए आवश्यक है। बाघों की सुरक्षा और उनके आवास की रक्षा करना हमारे लिए एक अनिवार्य कर्तव्य है।


India News Vista
136

Newsletter

Subscribe to our newsletter for daily updates and stay informed

Feel free to opt out anytime
Get In Touch

+91 99816 65113

[email protected]

Follow Us

© indianewsvista.in. All Rights Reserved.