भोपाल। स्वराज संस्थान संचालनालय, संस्कृति विभाग द्वारा हंसध्वनि सभागार में आयोजित 'एकै राम रहीम भजन संध्या' का आयोजन भक्ति और आध्यात्मिकता से भरपूर रहा। इस कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण थीं युवा भजन गायिका अभिलिप्सा पंडा, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज और भक्ति संगीत की विशिष्ट शैली से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अभिलिप्सा ने कार्यक्रम की शुरुआत "भोला सबको देता है..." भजन से की, जिसे सुनते ही दर्शक भी उनके साथ गुनगुनाने लगे और पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
कार्यक्रम में अभिलिप्सा ने "वैष्णव जन ते...", "छोड़ दे चिंता", "बम भोले बम", "हर हर शंभू", "नव दुर्गा नमो नमः", "आओ अवध बिहारी" और "राधा रानी लागे" जैसे कई कर्णप्रिय भजनों की प्रस्तुति दी। शिव, कृष्ण, राम सहित अनेक देवी-देवताओं के भजनों की सुरीली ध्वनि ने पूरे सभागार को भक्ति रस में डूबा दिया। उनकी सुमधुर प्रस्तुति ने हर आयु वर्ग के दर्शकों को संगीत के माध्यम से आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ा।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी भी उपस्थित रहे। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा "महात्मा गांधी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने बिना हिंसा के हमें आजादी दिलाई और देशवासियों को स्वदेश जागरण के माध्यम से जागरूक किया। गांधी जी की रामराज्य की परिकल्पना देश की स्वतंत्रता के बाद साकार हुई। वे चाहते थे कि सभी लोग सुखी, निरोगी और समृद्ध हों। मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान अभिलिप्सा पंडा को उनके अद्वितीय संगीत योगदान के लिए सम्मानित किया और उनके समर्पण की सराहना की।
अभिलिप्सा पंडा बचपन से ही संगीत की गहरी रुचि रखती थीं और उन्होंने शास्त्रीय संगीत एवं ओड़िसी क्लासिकल संगीत में शिक्षा प्राप्त की। उनकी मधुर आवाज और संगीत की गहरी समझ ने उन्हें भजन गायिकी के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। "हर हर शंभू" जैसे भजनों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई है, जिससे वे भजन संगीत की दुनिया में एक प्रतिष्ठित नाम बन गई हैं।
अभिलिप्सा पंडा की एक और खासियत यह है कि वे आठ से अधिक भारतीय भाषाओं में भजनों और गीतों की प्रस्तुति दे चुकी हैं। उनका बहुभाषी ज्ञान और संगीत में गहरी पकड़ उन्हें विशेष बनाता है। उन्होंने अपने संगीत करियर में कई वीडियो एलबम भी जारी किए हैं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा है। उनके भजनों की दिव्यता और गहराई ने उन्हें देशभर में भक्ति संगीत के क्षेत्र में लोकप्रिय बना दिया है।
संगीत के अलावा अभिलिप्सा पंडा ने खेल जगत में भी अपनी छाप छोड़ी है। वे कराटे में राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं और ब्लैक बेल्ट धारक हैं। यह उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है कि वे न केवल संगीत में बल्कि खेलों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। इस अनूठे संयोजन ने उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है।
'एकै राम रहीम भजन संध्या' के माध्यम से अभिलिप्सा पंडा ने सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का संदेश भी दिया। उन्होंने अपने भजनों के माध्यम से शिव, कृष्ण, राम सहित विभिन्न देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान किया, जो हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को एक सूत्र में पिरोता है। उनके गीतों में भक्ति की भावना के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक समर्पण की भी झलक मिलती है।
इस भजन संध्या का आयोजन महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के सम्मान में किया गया था। इस अवसर पर संस्कृति मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने महात्मा गांधी की महानता का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी जी ने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से देशवासियों को स्वदेश जागरण के माध्यम से प्रेरित किया। असहयोग आंदोलन और चंपारन सत्याग्रह का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि गांधी जी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर कर रामराज्य की परिकल्पना को साकार किया।
लोधी ने कहा "महात्मा गांधी ने हमें अहिंसा और सत्य का मार्ग दिखाया। उनके विचार और उनके कार्य हमें आज भी प्रेरित करते हैं। उनकी रामराज्य की अवधारणा का अर्थ था सबके लिए समानता, न्याय और कल्याण।
अभिलिप्सा पंडा अपने संगीत और भक्ति के प्रति अपनी निष्ठा को निरंतर बनाए रखते हुए आने वाले समय में और भी नई प्रस्तुतियां देने की योजना बना रही हैं। वे संगीत की गहराई को और अधिक विस्तार देने के लिए प्रयासरत हैं और भारतीय संगीत की समृद्ध धरोहर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प रखती हैं। उनके प्रशंसक बेसब्री से उनकी आने वाली प्रस्तुतियों का इंतजार कर रहे हैं और उन्हें विश्वास है कि अभिलिप्सा पंडा अपनी प्रतिभा से और भी दिलों को छूने में सफल होंगी।
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