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चार दिवसीय पुतुल समारोह में हुई एक दोस्त की खोज कथा की प्रस्तुति

कठपुतली कला का जादू: जनजातीय संग्रहालय में 'एकाग्र पुतुल समारोह' की रंगारंग शुरुआत

भोपाल। मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय में 13 से 16 अक्टूबर तक 'एकाग्र पुतुल समारोह' का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें कठपुतली कला की विभिन्न शैलियों का प्रदर्शन किया जा रहा है। यह समारोह जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा आयोजित किया गया है और प्रत्येक दिन शाम 6.30 बजे से शुरू हो रहा है। इस समारोह का उद्देश्य कठपुतली कला को प्रोत्साहित करना और इसे नई पीढ़ी के सामने लाना है।

समारोह की शुरुआत 13 अक्टूबर को दीप प्रज्जवलन एवं कलाकारों के स्वागत के साथ हुई। उद्घाटन समारोह में कई प्रमुख हस्तियों और कला प्रेमियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में पहली प्रस्तुति 'एक दोस्त की खोज' थी, जिसे गुड्डे और मपेट शैली में महाराष्ट्र की संज्ञा ओझा और उनके साथी कलाकारों ने पेश किया। यह प्रस्तुति दर्शकों को एक पुरानी कथा के माध्यम से कठपुतलियों के जादुई संसार में ले गई।


एक दोस्त की खोज

द पपेटेरियंस समूह द्वारा रचित इस कहानी में दर्शाया गया कि कैसे एक छोटा श्वान (कुत्ता) अपना सबसे शक्तिशाली दोस्त को खोजने निकलता है। इस सफर के दौरान उसे बंदर, शेर और अन्य जानवरों का सामना करना पड़ता है। अंत में वह एक शिकारी से मिलता है, जो उसका सबसे अच्छा और शक्तिशाली दोस्त बन जाता है। इस कथा के माध्यम से दर्शकों को यह संदेश दिया गया कि कैसे श्वान इंसान का सबसे अच्छा दोस्त बना और यह दोस्ती कितनी महत्वपूर्ण होती है।

एक घंटे की इस कहानी में संज्ञा ओझा और हाशिम हैदर ने बेहतरीन अभिनय किया, जिससे दर्शकों को न केवल मनोरंजन मिला, बल्कि उन्होंने इस पुरानी कथा से सीखने का भी मौका पाया। उनका प्रदर्शन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया और उन्होंने इसे तालियों के साथ सराहा।


राजस्थानी गीतों का रंग

इस समारोह के दौरान एक और प्रमुख प्रस्तुति भोपाल के मुकेश भारती और उनके साथियों द्वारा दी गई, जिसमें राजस्थानी गीतों और कहानियों का आनंद लिया गया। इस प्रस्तुति में उन्होंने राजस्थानी संस्कृति की विविधता को दर्शाया और दर्शकों को इस सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ा। यह प्रस्तुति भी बेहद सफल रही और दर्शकों ने इसे भरपूर प्यार दिया।

कठपुतली कला का महत्व

कठपुतली कला एक प्राचीन और समृद्ध भारतीय कला है, जो न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह शिक्षा का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। यह कला न केवल बच्चों को बल्कि बड़ों को भी ज्ञान और जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाती है। 'एकाग्र पुतुल समारोह' जैसे आयोजनों से न केवल इस कला को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि नए कलाकारों को भी प्रेरणा मिलती है कि वे इस पारंपरिक कला में अपनी रुचि विकसित करें।

समारोह के आयोजकों का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम संस्कृति को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे न केवल हमारे सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत किया जा सकता है, बल्कि यह लोगों को एकजुट करने का भी कार्य करता है।


आगे के कार्यक्रम

'एकाग्र पुतुल समारोह' में अगले कुछ दिनों में कई अन्य प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। यह समारोह न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव है, बल्कि यह हमारे समाज की कला और संस्कृति को एक नई दिशा देने का भी प्रयास है। दर्शकों को इस कार्यक्रम में शामिल होने और भारतीय लोककला की विविधता का अनुभव करने का निमंत्रण दिया गया है।

कुल मिलाकर, 'एकाग्र पुतुल समारोह' एक अद्भुत अनुभव है जो न केवल कठपुतली कला को जीवित रखता है, बल्कि यह दर्शकों के दिलों में इस कला के प्रति प्रेम और सम्मान भी उत्पन्न करता है। यह कार्यक्रम निश्चित रूप से एक यादगार अवसर है, जिसमें कला, संस्कृति और मनोरंजन का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

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