कार्यक्रम की शुरुआत में पंडित उदय भावलकर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए ध्रुपद की आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ध्रुपद केवल संगीत की एक शैली नहीं है, बल्कि यह निराकार से साकार और फिर साकार से निराकार की यात्रा है। हर आलाप, हर सांस, अनंत की आराधना और भक्ति की गहनता का प्रतीक होता है। ध्रुपद के माध्यम से व्यक्ति आत्मा और परमात्मा के बीच का संबंध महसूस कर सकता है और इसीलिए यह हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में विशेष स्थान रखता है। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि ध्रुपद में नाद के माध्यम से सृजन की अनंतता को महसूस किया जाता है, जिससे यह गायन शैली केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि आत्मिक साधना है।
सभागार में उपस्थित सभी श्रोताओं के लिए यह आयोजन एक अनोखा अनुभव था। ध्रुपद जैसी गंभीर और विशिष्ट शैली को पहली बार सुनते हुए, श्रोतागण उसकी गहराई और सौंदर्य से प्रभावित हुए। पंडित उदय भावलकर की प्रस्तुति ने श्रोताओं को इस तरह सम्मोहित किया कि कार्यक्रम की समाप्ति पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
उन्होंने राग भैरव के आलाप से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। पंडित जी ने बेहद शांतिपूर्ण ढंग से आलाप और बंदिश का ताना-बाना बुनते हुए श्रोताओं को सुर और ताल की गहराइयों में ले गए। उनका आलाप विस्तार करते हुए उन्होंने 'ॐ अनंत हरि नारायण' के अपभ्रंश मंत्र के आधार पर अपनी प्रस्तुति को आकार दिया। श्रोताओं को ध्रुपद की तकनीकी और आध्यात्मिक दोनों ही गहराइयों से परिचित कराया गया, जो उनके लिए एक अद्वितीय अनुभव था।
कार्यक्रम के दौरान पंडित उदय भावलकर ने मैनिट के विद्यार्थियों से भी बात की और उन्हें ध्रुपद जैसे शास्त्रीय संगीत के महत्व और इसके पीछे के समर्पण के बारे में समझाया। उन्होंने कहा कि ध्रुपद केवल गायन की एक शैली नहीं, बल्कि यह एक भक्ति और साधना है। इसमें निपुणता प्राप्त करने के लिए साधक को धैर्य, समर्पण और दृढ़ता की आवश्यकता होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि यह आत्मिक शांति और विकास का एक मार्ग हो सकता है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि संगीत, विशेष रूप से ध्रुपद, मन और आत्मा को संतुलित रखने का एक सशक्त साधन है। संगीत हमें एकाग्रता, धैर्य और आत्मिक शांति का पाठ पढ़ाता है, जो किसी भी व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक गुण हैं।
यह आयोजन मैनिट के स्पीकमैके (सोसाइटी फॉर द प्रमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड कल्चर अमंगस्ट यूथ) हेरिटेज क्लब द्वारा आयोजित किया गया था। स्पीकमैके क्लब का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और संस्कृति को युवाओं के बीच प्रचारित और प्रसारित करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से क्लब ने मैनिट के छात्रों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक दुर्लभ शैली से परिचित कराया, जो उन्हें न केवल संगीत की तकनीकीताओं को समझने में मदद करेगी, बल्कि उनके आत्मिक विकास में भी सहायक होगी।
पंडित उदय भावलकर ने अपने कार्यक्रम का समापन राग भैरव में एक भजन की प्रस्तुति के साथ किया। यह प्रस्तुति उनकी कला का चरमोत्कर्ष थी, जिसमें उन्होंने ध्रुपद की गहराइयों और उसकी आध्यात्मिकता को उजागर किया। श्रोताओं ने न केवल इस प्रस्तुति का आनंद लिया, बल्कि इसे अपने जीवन का एक विशेष अनुभव माना।
इस आयोजन ने मैनिट के विद्यार्थियों और शिक्षकों के मन में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति एक नई जागरूकता और रुचि जगाई।
पंडित उदय भावलकर का यह ध्रुपद गायन सत्र मैनिट के लिए एक ऐतिहासिक अवसर था। इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक दुर्लभ शैली से परिचित कराते हुए, संगीत की गहनता और उसकी आध्यात्मिकता से भी अवगत कराया।
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