भोपाल। भोपाल में रहने वाले पश्चिम ओडिशा के संबलुरी परिवार द्वारा 11वां नुआखाई भेटघाट पर्व धूमधाम से मनाया गया। जिसमें लगभग 400 प्रवासियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। यह कार्यक्रम न केवल पश्चिम ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का प्रदर्शन था, बल्कि प्रवासी ओडिया समुदाय को एक साथ लाने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी था। इस साल के आयोजन में पश्चिम ओडिशा के लगभग 40 कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया और अपने क्षेत्र की परंपराओं को भोपाल के दर्शकों तक पहुंचाया।
कार्यक्रम की शुरुआत में, पूजक विभुति भूए द्वारा पश्चिम ओडिशा की इस्टदेवी मां समलेश्वरी की पूजा विधि-विधान से की गई। नुआखाई पर्व ओडिशा में फसल कटाई के अवसर पर मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है और इस दौरान देवी समलेश्वरी की विशेष पूजा की जाती है। मां समलेश्वरी की पूजा के साथ कार्यक्रम का धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल बन गया, जिसमें देवी के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रदर्शन किया गया।
इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत ओडिशा के गायक दिलेश्वर विश्वाल द्वारा प्रस्तुत समलेश्वरी भजन से हुई, जिसने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को आध्यात्मिक अनुभव से भर दिया। भजन के मधुर सुरों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और पूरे कार्यक्रम का माहौल भक्तिमय बना दिया।
भोपाल में रहने वाले पश्चिमी ओडिशा की प्रवासी आबादी के सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाने के लिए सुंदरगढ़ ओडिशा से आए मयूरी सांस्कृतिक दल ने नृत्य प्रस्तुत किया। इस नृत्य प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, क्योंकि नर्तक दल ने पारंपरिक धुनों और गीतों पर अत्यंत सौम्य और जीवंत नृत्य किया। नृत्य के दौरान पश्चिमी ओडिशा की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक दिखी, जो दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ गई।
इस आयोजन में कई प्रतिभाशाली गायकों ने भी हिस्सा लिया। प्रणीति, दिलेश्वर विश्वाल, टीहीलू बाग, दुर्गा और नंदिनी ने अपने सुमधुर गीतों से सभी को मोहित किया। इनके गायन में पश्चिमी ओडिशा की परंपरागत संगीत शैली और उसकी मिठास का अद्भुत संगम देखने को मिला। इन कलाकारों की प्रस्तुति ने न केवल स्थानीय ओडिया समुदाय को, बल्कि सभी दर्शकों को एक सांस्कृतिक यात्रा पर ले जाने का काम किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पश्चिमी ओडिशा की प्रवासी महिलाओं का नृत्य प्रदर्शन था, जिन्होंने अपनी पारंपरिक वेशभूषा और नृत्य मुद्राओं से सभी को मोहित कर लिया। उनका नृत्य न केवल उनकी सांस्कृतिक जड़ों को दर्शा रहा था, बल्कि यह उस शक्ति और सामंजस्य का प्रतीक था, जो प्रवासी महिलाएं अपने संस्कारों और परंपराओं से बनाए रखती हैं।
इसके साथ ही, छोटे-छोटे बच्चों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया, जिसने सभी को भाव-विभोर कर दिया। बच्चों के उत्साह और उनकी प्रतिभा ने कार्यक्रम को और भी खास बना दिया। उनके मासूमियत भरे नृत्य और गीतों ने दर्शकों के दिलों को छू लिया। यह प्रदर्शन न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव था, बल्कि यह नई पीढ़ी में अपनी जड़ों से जुड़ने की भावना को प्रोत्साहित करने का भी एक सशक्त माध्यम बना।
इस आयोजन में कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों ने भी हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख रूप से डॉ. डीके सतपथी, जीएन साहू, एससी होता, आरके बारिक, मिनकेतन नाइक और डॉ. प्रतीक बेहरा शामिल थे। इन गणमान्य अतिथियों ने इस अवसर पर सांस्कृतिक पत्रिका 'कंहर' के 7वें संस्करण का लोकार्पण किया। यह पत्रिका पश्चिम ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने और उसे बढ़ावा देने का एक प्रयास है और इसके सातवें संस्करण के विमोचन ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया।
नुआखाई पर्व का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा पारंपरिक ओडिशी व्यंजनों का स्वाद लेना होता है। इस कार्यक्रम में बरगढ़, ओडिशा के किशोर मिश्रा द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक भोजन परोसा गया, जिसमें विशेष रूप से लेथा, काकरा और रसबारा जैसी पारंपरिक मिठाइयों का भरपूर आनंद लिया गया। इन व्यंजनों की खुशबू और स्वाद ने न केवल प्रवासी ओडिशा के लोगों को उनके घर की याद दिलाई, बल्कि अन्य लोगों को भी ओडिशा की समृद्ध भोजन परंपरा से रूबरू कराया।
पूरे दिन के इस आयोजन में पश्चिम ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाने वाली कई प्रस्तुतियां की गईं। पारंपरिक नृत्य रूपों जैसे डालखाई, रसरकेली, मइला जड़ और भाई जूंतीया के रंगारंग गीतों ने पूरे कार्यक्रम को एक उत्सवी माहौल में बदल दिया। इन नृत्यों और गीतों ने दर्शकों को न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि उन्हें पश्चिम ओडिशा की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक धरोहर से भी अवगत कराया।
कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए विभिन्न व्यक्तियों और समितियों ने अहम भूमिका निभाई। डीलेश्वर विस्वाल ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया, जबकि अध्यक्ष भाबग्रही प्रधान ने स्वागत भाषण देकर सभी अतिथियों का स्वागत किया। इसके अलावा, संजीव नंदा, प्रदीप माझी, भवानी खमारी, दिलीप मिश्रा, बिस्वजीत माझी, योगेन्द्र किशन, जीतेन्द्र त्रिपाठी, रमेश प्रधान और महेश्वर किशन ने इस आयोजन की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के अंत में किशोर केरकेटा ने सभी को धन्यवाद दिया और सभी प्रतिभागियों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया।
11वां नुआखाई भेटघाट पर्व संबलुरी समुदाय के लिए न केवल अपने सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर था, बल्कि यह उन प्रवासी ओडिशावासियों के लिए भी एक मंच बना, जो अपनी मातृभूमि से दूर रहते हुए भी अपनी परंपराओं और संस्कारों को जीवंत रखे हुए हैं। इस कार्यक्रम ने न केवल सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन किया, बल्कि सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव का संदेश भी दिया।
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