भोपाल। आंचलिक विज्ञान केंद्र द्वारा विज्ञान के प्रति जागरूकता और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करने के अपने प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए एक विशेष इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में भारत के प्रख्यात भौतिकविद और शिक्षाविद, पद्मश्री प्रोफेसर एचसी वर्मा ने शिरकत की। प्रोफेसर वर्मा ने न केवल वैज्ञानिक सोच के महत्त्व पर बल दिया, बल्कि यह भी बताया कि सही मायनों में विज्ञान को सीखने के लिए हमें प्रकृति की गहराइयों और उसकी अद्भुत प्रक्रियाओं को समझने की जरूरत है। आंचलिक विज्ञान केंद्र के क्यूरेटर साकेत सिंह कौरव ने बताया कि इस इंटरैक्विट सत्र के दौरान बड़ी संख्या में दर्शकों के साथ शहर के विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थी भी मौजूद रहे। जिन्होंने एचसी वर्मा जी से सवाल भी किए और उनके उत्तर सुनकर विद्यार्थियों को प्रेरणा मिली।
प्रोफेसर एचसी वर्मा जिन्हें उनकी भौतिकी की पाठ्यपुस्तकों और प्रयोगात्मक भौतिकी में उनके योगदान के लिए जाना जाता है, ने सत्र के दौरान श्रोताओं को प्रेरणादायक विचारों से परिचित कराया। उन्होंने कहा विज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, यह प्रकृति का अवलोकन करने, उससे प्रश्न पूछने और उसके रहस्यों को जानने की एक यात्रा है। उन्होंने वैज्ञानिक सोच के महत्त्व पर जोर देते हुए कहा कि हमें हर दिन की घटनाओं और प्रक्रियाओं में विज्ञान को ढूंढने की आदत डालनी चाहिए।
प्रोफेसर वर्मा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल तथ्यों को रटना नहीं होना चाहिए, बल्कि क्रिटिकल थिंकिंग, रचनात्मकता और सवाल पूछने की क्षमता का विकास करना भी होना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को भी रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षक अपने छात्रों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में काम करें, जिससे वे विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और नए विचारों की खोज की भावना को बढ़ावा दे सकें।
सत्र का मुख्य आकर्षण प्रोफेसर वर्मा की वार्ता रही, जिसमें उन्होंने प्रकृति के अवलोकन को विज्ञान के साथ जोड़ने का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं या कक्षाओं में सीमित नहीं होता, यह हमारे चारों ओर फैला हुआ है और हमें इसे समझने के लिए अपनी आंखों को खोलने की जरूरत है। उन्होंने प्रकृति में घटित होने वाली घटनाओं के उदाहरणों के माध्यम से यह समझाने की कोशिश की कि कैसे छोटे-छोटे बदलाव और प्रक्रियाएं भी बड़े वैज्ञानिक सिद्धांतों को परिभाषित कर सकती हैं।
प्रोफेसर वर्मा ने कहा कि छात्रों को ऐसी घटनाओं का अवलोकन करना चाहिए जो उनके आसपास हो रही हैं। उदाहरण के लिए, वे यह देख सकते हैं कि कैसे एक पत्ता गिरता है, कैसे पानी की बूंदें बिखरती हैं या कैसे सूर्यास्त के समय रंग बदलते हैं। ये सभी छोटी-छोटी बातें विज्ञान को जीवंत बनाती हैं।
सत्र के दौरान, प्रोफेसर वर्मा ने युवा श्रोताओं से भी बातचीत की और विज्ञान शिक्षा और सीखने से जुड़े उनके सवालों के उत्तर दिए। छात्रों ने प्रोफेसर वर्मा से पूछा कि विज्ञान को अधिक रोचक और प्रभावी तरीके से कैसे सीखा जा सकता है। इसके उत्तर में प्रोफेसर वर्मा ने बताया कि विज्ञान की शिक्षा तभी सजीव होती है जब उसे कक्षा के बाहर भी लागू किया जाए।
उन्होंने छात्रों को सुझाव दिया कि वे प्रयोगों और अवलोकनों के माध्यम से विज्ञान को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। साइंस एक खोज है और इस खोज का रास्ता हर एक व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। आपको बस अपनी जिज्ञासा को बनाए रखना है।
सत्र का एक विशेष पहलू यह रहा कि इसे आंचलिक विज्ञान केंद्र के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित किया गया। इस पहल ने न केवल भोपाल में उपस्थित श्रोताओं को, बल्कि देशभर के विज्ञान प्रेमियों को इस प्रेरक वार्ता का हिस्सा बनने का मौका दिया। ऑनलाइन माध्यम से सत्र की उपलब्धता भविष्य में भी आम जनमानस को इसका लाभ उठाने का अवसर प्रदान करेगी।
इस कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और आम जनता सहित लगभग 300 श्रोताओं ने भाग लिया। उनके लिए यह एक सुनहरा अवसर था कि वे भारत के एक जाने-माने वैज्ञानिक और शिक्षक से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर सकें और उनसे प्रेरणा ले सकें।
कार्यक्रम में भाग लेने वाले एक छात्र ने कहा प्रोफेसर वर्मा की बातें हमें प्रेरित करती हैं कि हम सिर्फ पाठ्यपुस्तकों पर निर्भर न रहें, बल्कि अपने आसपास की दुनिया को समझने की कोशिश करें। विज्ञान एक रोमांचक यात्रा है और हमें इसे पूरे उत्साह के साथ अपनाना चाहिए।
सत्र के अंत में प्रोफेसर एचसी वर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा हम सभी को विज्ञान के प्रति जिज्ञासु होना चाहिए और यह समझना चाहिए कि विज्ञान न केवल एक विषय है, बल्कि एक जीवन जीने का तरीका भी है। यह कार्यक्रम छात्रों और शिक्षकों के लिए न केवल एक ज्ञानवर्धक अनुभव था, बल्कि इसने उन्हें विज्ञान के प्रति नई दृष्टिकोण और समझने की दिशा दी। आंचलिक विज्ञान केंद्र ने इस इंटरैक्टिव सत्र के माध्यम से विज्ञान और शिक्षा के प्रति अपने समर्पण को एक बार फिर प्रदर्शित किया है।
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