भोपाल। स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी (एसजीएसयू) ने हाल ही में 'लेखन और उसकी विविध संभावनाओं' विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में प्रमुख लेखकों, नीलोत्पल मृणाल और दिव्य प्रकाश दुबे ने अपने अनुभव साझा करते हुए लेखन के नए आयामों पर चर्चा की। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को लेखन के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए मार्गदर्शन देना और इस क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं से अवगत कराना था।
अनुभव के आधार पर दिए सुझाव
कार्यशाला के दौरान, नीलोत्पल मृणाल ने लेखन के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए अपने अनुभवों पर आधारित महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने बताया कि लेखन की शुरुआत किसी भी व्यक्ति के लिए रोज एक पन्ना लिखने से की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि लेखन में मजबूती लाने के लिए विविध विषयों का अध्ययन करना आवश्यक है। मृणाल ने जोर दिया कि लेखन सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि एक पेशे के रूप में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें असीम संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समय के साथ लेखन को करियर के रूप में अपनाने के अवसर भी बढ़ रहे हैं, विशेषकर डिजिटल युग में जहां लेखकों के लिए नए प्लेटफार्म उभर रहे हैं।
नई दिशाओं में विस्तारित हुआ लेखन का क्षेत्र
दिव्य प्रकाश दुबे ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण अनुभव साझा किए, जिसमें फिल्म निर्देशक मणिरत्नम के साथ काम करने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति में प्रतिभा होती है, तो लोग उस पर विश्वास करते हैं और उसे अवसर देते हैं। दुबे ने बताया कि लेखन का क्षेत्र अब कई नई दिशाओं में विस्तारित हो चुका है। आज के समय में ऑडियो लेखन, फिल्म के संवाद लेखन, स्क्रिप्ट राइटिंग जैसे क्षेत्रों में भी लेखकों के लिए बड़े अवसर हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इन क्षेत्रों में लेखकों को लाखों रुपये प्रति माह की कमाई हो सकती है, यदि वे अपने कौशल को सही दिशा में विकसित करें। दुबे ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि लेखन के क्षेत्र में अगर आत्मविश्वास और सृजनशीलता हो, तो यह एक मजबूत करियर विकल्प हो सकता है।
लेखन के क्षेत्र में नए आयामों की खोज
इस कार्यशाला में स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य केवल तकनीकी कौशल प्रदान करना नहीं है, बल्कि छात्रों को मानविकी और लिबरल आर्ट्स के क्षेत्रों में भी कौशल के महत्व से अवगत कराना है। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय का फिल्म और मीडिया विंग इस दिशा में लगातार सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन करता रहता है ताकि छात्रों को लेखन और कला के अन्य क्षेत्रों में करियर के अवसरों की जानकारी मिल सके। डॉ. चतुर्वेदी ने इस कार्यशाला को छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया, जिसमें वे लेखन के क्षेत्र में नए आयामों की खोज कर सकते हैं और इस क्षेत्र को एक पेशे के रूप में चुनने के लाभों को समझ सकते हैं।
छात्रों के व्यक्तित्व विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्यशालाएं
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. सितेश सिन्हा ने बताया कि एसजीएसयू निरंतर स्किल डेवलपमेंट और न्यू एज स्किल्स के उन्नयन पर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि लेखन और संवाद कौशल जैसे विषयों पर आयोजित की जाने वाली इस प्रकार की कार्यशालाएं छात्रों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। डॉ. सिन्हा ने लेखन के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में रचनात्मक लेखन, संवाद लेखन और अन्य साहित्यिक कौशल न केवल पेशेवर बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी सफलता की कुंजी हैं।
न्यूजलेटर का विमोचन
इस कार्यशाला में 'विश्वरंग मॉरिशस' के न्यूजलेटर का विमोचन भी किया गया, जो इस प्रकार के कार्यक्रमों और कार्यशालाओं में विश्वविद्यालय की सक्रिय भागीदारी का प्रतीक है।
कार्यक्रम का संचालन विकास अवस्थी द्वारा किया गया, जबकि मंच संचालन का कार्य विशाखा राज ने संभाला। कार्यशाला में लेखन के क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्रों और प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने लेखन से जुड़ी विविध संभावनाओं को गहराई से समझने और भविष्य में इसे एक पेशे के रूप में अपनाने के लिए प्रेरणा प्राप्त की।
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