भोपाल। रवीन्द्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर 18 से 24 अक्टूबर तक मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित श्रीरामलीला उत्सव के छठवें दिन लक्ष्मण शक्ति एवं कुंभकर्ण-मेघनाद-रावण वध के प्रसंगों की अद्भुत प्रस्तुति दी गई। यह आयोजन अवध आदर्श रामलीला मण्डल, अयोध्या (उ.प्र) के कुशल कलाकारों द्वारा किया जा रहा है, जिन्होंने रामायण के विभिन्न प्रसंगों को बेहद जीवंतता से मंच पर उतारा।
लक्ष्मण शक्ति: मेघनाद और लक्ष्मण का महायुद्ध
बुधवार की शाम, प्रभु श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण और रावण के पुत्र मेघनाद के बीच हुए भयंकर युद्ध का मंचन किया गया। इस दृश्य में लक्ष्मण भगवान राम का आशीर्वाद लेकर रणभूमि में उतरते हैं, जहां उनका सामना मेघनाद से होता है। दोनों योद्धाओं के बीच अत्यधिक तीव्र और रोमांचक युद्ध होता है। जब मेघनाद यह समझ जाता है कि वह लक्ष्मण को पराजित नहीं कर पाएगा, तो वह शक्तिवाण का प्रयोग करता है, जिससे लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। इस दृश्य में दर्शकों की सांसे थम जाती हैं, जब लक्ष्मण रणभूमि में अचेत होकर गिरते हैं।
लक्ष्मण की यह अवस्था देखकर प्रभु श्रीराम अत्यंत दुखी होते हैं और विलाप करने लगते हैं। इस समय पर सबसे बुद्धिमान मंत्री जामवंत से सलाह ली जाती है, जो बताते हैं कि केवल लंका के वैद्य सुषेन ही लक्ष्मण के प्राण बचा सकते हैं। इसके बाद हनुमान जी अपनी अद्वितीय शक्ति का प्रदर्शन करते हुए लंका से सुषेन वैद्य को लेकर आते हैं।
सुषेन लक्ष्मण का निरीक्षण करते हैं और कहते हैं कि केवल संजीवनी बूटी ही लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा कर सकती है। यह बूटी धौलागिरी पर्वत पर स्थित है। हनुमान जी तुरंत धौलागिरी पर्वत की ओर निकल पड़ते हैं, लेकिन जब उन्हें बूटी की पहचान नहीं होती, तो वे पूरा पहाड़ ही उठाकर ले आते हैं। सुषेन संजीवनी बूटी का प्रयोग लक्ष्मण पर करते हैं, जिससे वे पुनः जीवित हो जाते हैं। इस दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। प्रभु श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण को गले लगाते हैं और फिर से युद्ध की तैयारी की घोषणा करते हैं।
श्रीरामलीला उत्सव के समापन दिवस 24 अक्टूबर को भक्तिमती शबरी लीला, भरत मिलाप और श्रीराम राज्याभिषेक का मंचन किया जाएगा। इन प्रसंगों का निर्देशन गीतांजलि गिरवाल द्वारा किया जाएगा। भरत मिलाप का दृश्य बेहद मार्मिक होगा, जिसमें भरत और राम का मिलन दिखाया जाएगा। इसके बाद श्रीराम के अयोध्या लौटने और उनके राज्याभिषेक की भव्यता को प्रदर्शित किया जाएगा। इस प्रसंग में न्याय, धर्म और आदर्श की स्थापना का संदेश मिलेगा, जो रामायण के सार को संक्षेप में दर्शाता है।
श्रीरामलीला उत्सव के दौरान “श्रीरामराजा सरकार” के रूप में श्रीराम के छत्तीस गुणों का चित्रकथन और “वनवासी श्रीराम” वनगमन पथ के महत्त्वपूर्ण स्थलों का चित्रांकन किया गया है। इसके अतिरिक्त, “चरित” नामक प्रदर्शनी में रामलीला में प्रयुक्त मुखौटे और मुकुटों का प्रदर्शन भी किया गया है, जो दर्शकों को रामायण के चरित्रों के और करीब ले जाता है। इस उत्सव का उद्देश्य रामकथा को जीवंत करना और भारतीय संस्कृति एवं धर्म के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है।
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